पियरेफ़ोंड्स (Pierrefonds) एक फ्रांसीसी सिरेमिक फैक्ट्री थी जिसकी स्थापना 1903 में फ्रांस के पियरेफ़ोंड्स में हुई थी।
फैक्ट्री की स्थापना शुरू में काउंट ओलिवियर डे सोरा (Conde Olivier de Sorra) ने की थी।
इसकी उत्कृष्टता को 1925 में पेरिस सजावटी कला प्रदर्शनी (Exposición de Artes Decorativas de París) में रजत पदक से मान्यता मिली, जिससे लक्जरी निर्माता के रूप में इसकी प्रतिष्ठा मजबूत हुई।
फैक्ट्री लोरेंट के मूर्तिकार एमिल बॉउलॉन (Émile Bouillon) के निर्देशन में फलने-फूलने लगी, जो 1912 में कंपनी में शामिल हुए और अंततः 1937 में कंपनी का नियंत्रण संभाला।
पियरेफ़ोंड्सउच्च गुणवत्ता वाले स्टोनवेयर (gres) में विशिष्ट था।
वे विशेष रूप से अपने उत्तम क्रिस्टलीय ग्लेज्ड (esmaltes cristalinos) के लिए प्रसिद्ध थे, जो अक्सर हल्के से मध्यम नीले रंग के रंगों में होते थे, कभी-कभी गेरू या हरे रंग के साथ विपरीत होते थे। गहरा नीला एक दुर्लभ रंग था। ये अद्वितीय ग्लेज्ड ग्लेज्ड और जस्ता से जुड़ी जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं का परिणाम थे।
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शैली आर्ट डेको शैली
आर्ट डेको (Art Deco) नाम 1960 के दशक में पेरिस के म्यूज़ियम ऑफ़ डेकोरेटिव आर्ट्स (Musée des Arts Décoratifs) में आयोजित "लेस एनेस 25" (Les Années 25) नामक प्रदर्शनी में दिया गया था।
इस शैली के पहले नमूने 1925 में पेरिस में आयोजित "इंटरनेशनल एग्ज़ीबिशन ऑफ़ डेकोरेटिव आर्ट्स एंड मॉडर्न इंडस्ट्री" (International Exhibition of Decorative Arts and Modern Industry) में देखे जा सकते थे। यह प्रदर्शनी 1902 में ट्यूरिन और 1906 में मिलान में हुई प्रदर्शनियों की सीधी प्रतिक्रिया थी।
आर्ट डेको शैली 1920 से 1940 के बीच उभरी और यह सममित, सीधी रेखाओं, अमूर्त डिज़ाइनों और बोल्ड रंगों से पहचानी जाती है।
इसमें चर्मपत्र (pergamino), शार्क की त्वचा (एक छोटी मछली), क्रोम के टुकड़े और इनेमल जैसे विदेशी सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया। हाथीदांत और सीप के जड़नकाम (inlays) का भी उपयोग होता था।
इसके विपरीत, आर्ट नोव्यू (Art Nouveau) शैली में प्रकृति से प्रेरित असममित, घुमावदार रेखाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था।